Banking stocks की ऐनालीसिस कैसे करें | banking stocks analysis in hindi

आज के इस लेख में हम banking stocks की ऐनालीसिस कैसे करें (banking stocks analysis in hindi) के बारे में विस्तार से जानेंगे | 

शेयर बाजार में बहुत प्रकार के सेक्टर उपलब्ध हैं और हर सेक्टर का ऐनालीसिस करने की प्रक्रिया अलग-अलग होती है | 

इस लेख में हम उन महत्तवपूर्ण  रेश्यो के बारे में जानने का प्रयास करेंगे जिसकी मदद दे हम एक अच्छे बैंक स्टॉक को ढूंढ सकें और उसमे निवेश कर सकें | 

Banking stocks ki analysis kaise kare (banking stocks analysis in hindi)

जैसे की मैंने इसके पहले आपको बताया कि मार्केट में बहुत सेक्टर हैं और हर सेक्टर के लिए हमें अलग-अलग पैरामीटर देखने को मिलते हैं और बैंकिंग स्टॉक का ऐनालीसिस करने के लिए हमें बहुत अलग दृष्टिकोण अपनाना पड़ता है, जोकी हम इस लेख में सीखेंगे

सबसे पहला पैरामीटर जो हमें मुख्य रूप से बैंकिंग स्टॉक का ऐनालीसिस करते समय देखना है उसका नाम है CASA ratio 

CASA ratio kya hai (what is CASA ratio in hindi)

banking stocks analysis in hindi का ये हमारा पहला पैरामीटर है। CASA का फुल फॉर्म होता है Current Account aur Saving account. CASA पैरामीटर हमें ये बताता है कि बैंक के पास कितने प्रतिशत चालू (current) और बचत(saving) खाते हैं 

चलिए इसे हम एक उदाहरण से समझते हैं, अगर किसी बैंक का CASA अनुपात 45% है तो, इसे हमें ये पता चलता है कि अगर बैंक के पास 100 खाता है तो उसमें से 45 खाता उनके current और saving खाता है 

CASA पैरामीटर जरूरी क्यों है ?

जब भी हम किसी बैंक का ऐनालीसिस करते हैं तो उसमें CASA अनुपात पर बहुत जोर दिया जाता है, अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यों?

ऐसा इसलिए है क्योंकि अगर किसी बैंक का CASA अनुपात अच्छा होता है तो ये दिखाता है कि हमारे बैंक में अच्छे खासे cash डिपॉजिट होंगे, मतलब की उनका रिटेल कैशफ्लो अच्छा होगा 

करंट और सेविंग अकाउंट mayn adhiktar आम जनता का पैसा होता हैn जिसपे बैंक बिज़नेस को लोन देती है और अच्छा ख़ासा ब्याज कमाती है 

चालू और बचत खाते में बैंक को फ़ायदा ही होता है क्योंकि उन्हें चालू खाते पर 0% का ब्याज देना पड़ता है और बचत खाते पर 3% से 4% का ब्याज देना पड़ता है 

अगर किसी भी बैंक का CASA अनुपात उसके प्रतिस्पर्धी बैंक से ज़्यादा होता है तो ये ये उस बैंक के लिए अच्छी बात होती है और उसकी मज़बूती के बारे में बताती है

मगर एक महत्वपूर्ण बात, मैं आपको बताना चाहूंगा और वो ये है कि आपको सिर्फ CASA अनुपात से किसी बैंक को अच्छा और बेकार घोषित नहीं कर देना है, इसके अलावा भी बहुत सारे पैरामीटर होते हैं जिसे आपको देखना पड़ेगा

चलिए अब हम अगले पैरामीटर को देखते हैं जोकी है book value और price to book value.

Book value और price to book value से ऐनालीसिस कैसे करें ?

banking stocks analysis in hindi का यह हमारा दूसरा पैरामीटर है | Book value  और price to book value हमे banking shares  के वैल्यूएशन के बारे में बताता है।

 वैसे तो बहुत सारे लोग बुक वैल्यू को ही शेयर का इंट्रिंसिक वैल्यू मानते हैं पर ऐसा नहीं होता है।  बुक वैल्यू को आप ऐसे समझ सकते हैं । 

कंपनी के जीतने भी assets है अगर हम उनको बेच दें और उसके सब कर्जे चुकाने के बाद जो भी पैसा प्राप्त हो उसे हम बुक वैल्यू मान सकते हैं।

वैसे देखा जाए तो बैंकिंग स्टॉक्स का बुक वैल्यू कम होता है, ऐसा इसलिए है क्योंकि बैंक का काम होता है लोन देने का और उसके कुछ लोन वापस न मिलने के भी chances रहते हैं, इसलिए इन पैसों को उनके शेयर प्राइस पहले से ही डिस्काउंट कर के चलती है | 

अगर किसी भी बैंक का प्राइस टु बुक वैल्यू 1 से 2 के आसपास है तो उससे यह पता चलता है कि यह बैंक अभी नॉर्मल वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है।  यह सिर्फ एक क्राइटीरिया है, आपको सिर्फ प्रेस टू वैल्यू देखकर किसी भी बैंक के शेयर को खरीदना नहीं चाहिए।

Banking stocks analysis in hindi
Banking stocks की ऐनालीसिस कैसे करें in hindi

NPA से Banking stocks की ऐनालीसिस कैसे करें ?

banking stocks analysis in hindi का यह हमारा तीसरा परमिटर है | NPA का  फुल फॉर्म होता है नॉन परफॉर्मिंग असेट्स (Non-Performing Assets) | 

बैंक का काम होता है लोन देने का तो NPA हमें यह बताता है कि अगर बैंक ने पैसा बांटे हैं तो कितने पैसे उसके पास वापस नहीं आ रहे हैं।

NPA जितना कम होता है वो बैंक उतना अच्छा माना जाता है क्यूंकी बैंक को लोन देते समय यह पता रहता है उन्हे किनसे पैसे वापस मिल सकते हैं, जिससे यह साफ पता चलता है कि बैंक अच्छे से लोन का वितरण कर रही है और अपना लोन बुक मैन्टैन की हुई है | 

Cost Of Liability से क्या पता चलता है ?

हमारे banking stocks analysis in hindi का अगला पैरामीटर है कॉस्ट ऑफ लाइबिलिटी (Cost Of Liability) | चलिए अब जान लेते हैं कि यह हमे क्या बताता है और कितना होना चाहिए | 

 बैंक के पास बहुत तरह के अकाउंट होते है जिसपे कि उन्हें इंटरेस्ट देना पड़ता है। जैसे ही सेविंग अकाउंट फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), RD |  यही इंटरेस्ट उनके लिए लायबिलिटी का काम करती है।

इसमे उन्हें अपने कस्टमर को पैसा देना पड़ता है तो कॉस्ट ऑफ लायबिलिटीज जितनी कम रहेगी उस बैंक के लिए वह उतना अच्छा होगा।

Advance Growth या Laon Growth क्या होता है ?

कोई बैंक कितनी तेजी से बढ़ रहा है या ग्रो कर रहा है,  इस चीज़ का पता एडवांस ग्रोथ से लगाया जा सकता है | advance growth, banking stocks analysis in hindi का बहुत ही महत्वपूर्ण परमिटेर है |

बैंक अगर अच्छे बिज़नेस को हाई  इंटरेस्ट पर लोन दे रही है और उन्हें उनका दिया हुआ लोन ब्याज के साथ वापस भी मिल रहा है तो स्वाभिविक रूप से उसका एडवांस ग्रोथ ज़्यादा होगा।  एडवांस ग्रोथ अगर 20 से ज्यादा  और 25 के आसपास है तो वह अच्छा होता है।

CAR% (Capital adequacy Ratio)

banking stocks analysis in hindi का  हमारा अगला पैरामीटर है कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो।  कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो से अमेया पता चलेगा कि बैंक के पास पैसे है। ऑडियो अच्छे से लोन दे सकता है।

 कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो को बढ़ाना वैसे तो मुश्किल होता है पर इसे दो तरीकों से बढ़ाया जा सकता है। 

  • सबसे पहले  अगर कोई बैंक अपना CASA रेशियो बढ़ा ले मतलब कि अपने डिपॉजिट्स बढ़ाए,  अगर इनके पास डिपॉजिट होंगे, तो या ज्यादा लोन दे पाएंगे।।
  • दूसरा तरीका है अपना नेट NPA को कम करके,  कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो को बढ़ाया जा सकता है।

कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो अगर 12% और उससे कम है तो यह बैंक के लिए अच्छी बात नहीं होती है।  कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो और एडवांस ग्रोथ का सीधा रिश्ता है अगर कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो ज्यादा होगा तो उसमें एडवांस ग्रोथ ज्यादा होने की संभावनाएँ होंगी।

अगर किसी बैंक का कैपिटल  एडिक्वेसी रेशियो ज्यादा है तो  इसका मतलब है उनके पास पैसे हैं और वो लोन दे सकती है |  लोन देने के साथ साथ अगर  वह अपना एनपीए (NPA) कम कर लेती है तो उसका एडवांस ग्रोथ बहुत अच्छे से बढ़ सकता है।

NIM % (Net interest margin)

बैंक हाई इंटरेस्ट रेट पर लोन देती है और उस लोन का इंटरेस्ट जो बैंक के पास आया और बैंक ने उस  इंटरेस्ट में से अपने ग्राहकों को कितना दिया इस चीज़ को अगर हम घटाएंगे तो नेट इंटरेस्ट मार्जिन के बारे में पता चल जाएगा।

 चलिए इसे हम एक उदाहरण से समझते हैं। बैंक ने एक बिज़नेस को 100 रुपए के ऊपर 10% का लोन दिया  और बैंक ने 1 साल बाद इस लोन को चुकाया और बैंक को ₹110 दिए।

चूंकि बैंक को आपको भी तो  इंटरेस्ट देना है तो बैंक ने आपको उस 110 में से ₹105 दे दिया और  बैंक के पास बचे ₹5 यही ₹5 बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन होता है।

बैंक का नेट इंट्रेस्ट मार्जिन जितना ज़्यादा होगा वह बैंक उतना अच्छा होगा।

ROA % (Return on assets)

banking stocks analysis in hindi का यह हमारा अगला  पैरामीटर है | बैंक अपने ऐसेट्स पे कितना अच्छा रिटर्न बना पा रही है। उस चीज़ का पता हमे ROA से चलता है।

किसी भी बैंक का ROA 1% से कम है तो उसे बेकार माना जाता है और अगर किसी भी बैंक का ROA 2% के आसपास और 1.5% के पास है तो वह उतना ही अच्छा होता है। 

ROA को हमेशा फाइनेंशियल ईयर खत्म होने पर  दिखाया जाता है। रिटर्न ऑन ऐसेट्स (ROA) बैंक का तभी अच्छा होगा जब वह अपने लोन को अच्छे से डायवर्सिफाइड करके रखी होगी।

निष्कर्ष (Conclusion)

हम आशा करते हैं की आपको यह लेख banking stocks की ऐनालीसिस कैसे करें (banking stocks analysis in hindi) पसंद आया होगा | आप अब जब भी अगली बार किसी भी बैंक का अनैलिसिस करने जाएंगे तो आपको इन सभी परमिटर को ध्यान से देखना है और किसी एक परमिटेर के आधार पर शेयर को नहीं खरीद लेना है |

FAQ

banking stocks analyse करते समय क्या – क्या परमिटर देखना चाहिए ?

banking stocks analyse करते समय आपको price to book value, CASA ratio, NPA aur ROI जैसे parameter को देखना चाहिए |

मेरा नाम कौशल कुमार है और मैं इस वेबसाईट का संस्थापक हूँ | मैं इस वेबसाईट के माध्यम से आप सभी को शेयर मार्केट की बारीक जानकारियों को बताना चाहता हूँ जिससे आप भी शेयर मार्केट से पैसे कमा सकें | मैं शेयर मार्केट में काफी समय से काम कर रहा हूँ और मेरा उद्देश है कि अपने अनुभव को आप तक पहुंचा सकूँ |