ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है, Types of Trading in Hindi

अगर आप भी ट्रेडिंग कर के पैसे कमाना चाहते हैं परंतु आप ट्रेडिंग के प्रकार (Types of trading in hindi) के बारे में नहीं जानते तो आपके लिए यह कर पाना थोड़ा मुश्किल होगा | 

ट्रेडिंग के जरिया है खुद कर बारे में जानने का, अगर आप अपने बारे में नहीं जानते तो आपको अपने लिए सही ट्रेडिंग स्टाइल चुनने में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है | 

शेयर बाजार में पैसा कमाने या निवेश करने के दो तरीके हैं। पहला तरीका है कंपनी का fundamental analysis करके अन्डर्वैल्यू शेयर में निवेश कर के पैसे कमाना |

दूसरा तरीका है technical analysis करके शेयर का सपोर्ट – रेसिस्टेंस खोजकर ट्रेडिंग करके पैसे कमाना | 

अगर fundamental analysis कारण है तो technical analysis उसका परिणाम है। ट्रेडिंग करने के लिए technical analysis की जरुरत होती है | कारण कई हो सकते हैं, लेकिन परिणाम एक ही होता है। 

यहाँ पर हम आपको Different types of trading in stock market के बारे में बताएंगे जिससे कि आप अपनी पर्सनालिटी के हिसाब से अपनी ट्रेडिंग स्टाइल को चुन सके |

Table of Contents

शेयर बाजार में ट्रेडिंग के प्रकार | Types of trading in Hindi 

  • स्काल्पिंग ट्रेडिंग
  • इंट्राडे ट्रेडिंग
  • डिलीवरी ट्रेडिंग
  • स्विंग ट्रेडिंग
  • मोमेन्टम ट्रेडिंग
  • पोजीशनल ट्रेडिंग
  • सपोर्ट – रेजिस्टेंस ट्रेडिंग
  • ब्रेक आउट ट्रेडिंग
  • फ्यूचर ट्रेडिंग
  • ऑप्शन ट्रेडिंग
  • मार्जिन ट्रेडिंग
  • एल्गो ट्रेडिंग
  • मुहूर्त ट्रेडिंग
  • BTST trading और STBT ट्रेडिंग

ऊपर दिए गए लिस्ट में जितने भी प्रकार की ट्रेडिंग है, इन्ही में से बहुत सारे ट्रेडर अपनी ट्रेडिंग स्टाइल के अनुसार ट्रेडिंग करते हैं | 

तो चलिए एक – एक करके हम all types of trading in stock market के बारे में जानने का प्रयास करते हैं | 

स्काल्पिंग ट्रेडिंग (Scalping Trading )

Types of trading in hindi में यह हमारी पहली ट्रेडिंग स्टाइल है, जिसमे ट्रेडर कुछ सेकंड और मिनटों के लिए शेयर को खरीदते हैं और उसे प्रॉफिट और लॉस में बेच देते हैं | 

इस प्रकार के ट्रेडिंग को करने वाले Traders को scalpers के रूप में जाना जाता है और इस ट्रेडिंग स्टाइल को स्काल्पिंग ट्रेडिंग कहते हैं | 

इस प्रकार की ट्रेडिंग करने के लिए आपको निर्णय लेने में बहुत तेज होना पड़ेगा क्योंकि आपको 1 से 5 मिनट के भीतर स्टॉक को खरीदना और बेचना रहता है। 

अगर आप तुरंत निर्णय नहीं ले पाते हैं तो यह ट्रेडिंग स्टाइल आपके लिए बिल्कुल भी नहीं है | 

स्काल्पिंग ट्रेडिंग आप 1 मिनट से 5 मिनट के टाइम फ्रेम में कर सकते हैं |  आप 5 मिनट के टाइम फ्रेम को एनालिसिस के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं और 1 मिनट के टाइम फ्रेम में आप ट्रेड ले सकते हैं | 

स्काल्पिंग ट्रेडिंग में ट्रेडर्स लोग कुछ पैसे और कुछ पॉइंट्स के लिए ट्रेडिंग करते हैं | चूंकि इसमें बहुत कम पॉइंट्स के लिए ट्रेडिंग की जाती है तो इसमें आपको क्वांटिटी ज्यादा लेनी रहती है |

बहुत सारे ट्रेडर्स निफ़्टी बैंक एवं निफ्टी के ऑप्शन में स्काल्पिंग ट्रेडिंग को करते हैं और कुछ कुछ तो इसे स्टॉक और स्टॉक के ऑप्शंस में भी करते हैं  |

अगर आपको स्काल्पिंग ट्रेडिंग  हाथ आजमाना ही है तो  आप इसे निफ्टी 50 और निफ्टी 100 के स्टॉक में करके देख सकते हैं | 

यदि आप इस ट्रेडिंग को लंबे समय तक करते हैं, तो इसका आपके दिमाग और शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है |

इंट्राडे ट्रेडिंग (Intraday trading)

Types of Trading in Hindi में अब इंट्राडे ट्रेडिंग के बारे में जानेंगे | इंट्राडे ट्रेडिंग एक ऐसे प्रकार की ट्रेडिंग है जिसमें ट्रेडर्स लोग एक ही दिन में शेयर को खरीदते हैं और उसी दिन शेयर को बेच भी देते हैं | 

इंट्राडे ट्रेडिंग को डे ट्रेडिंग के नाम से भी जाना जाता है और इसे आप सिर्फ मार्केट hour  के दौरान ही कर सकते हैं | 

 इंट्राडे ट्रेडिंग करने के लिए आपको दो चीजों का ज्ञान होना चाहिए | पहला कैंडलस्टिक पैटर्न और दूसरा सपोर्ट और रेजिस्टेंस

हमने इन दोनों टॉपिक के ऊपर लेख लिखा हुआ है जिसे आप पढ़ सकते हैं और इसे अपनी ट्रेडिंग में कैसे इस्तेमाल करना है उसे जान सकते हैं | 

इसके अलावा इंट्राडे ट्रेडिंग में एक और चीज का बहुत महत्व होता है और वह है स्टॉप – लॉस | अगर आप इंट्राडे ट्रेडिंग कर रहे हैं और अपने स्टॉप लॉस नहीं लगाया हुआ है तो आपको इससे भारी नुकसान हो सकता है | 

इंट्राडे ट्रेडिंग करने के लिए आप 5 मिनट से 15 मिनट के टाइम फ्रेम को इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि इंट्राडे ट्रेडिंग में इन्हीं दो टाइम फ्रेम को बहुत अच्छा माना गया है | 

डिलीवरी ट्रेडिंग (Delivery Trading)

Types of trading in hindi में अब हम डिलीवरी ट्रेडिंग के बारे में जानेंगे |  डिलीवरी ट्रेडिंग में आप स्टॉक को खरीद कर अपने डिमैट अकाउंट में काफी लंबे समय के लिए रखते हैं | 

एक तरह से देखा जाए तो इसे लॉन्ग टर्म इन्वेस्टिंग कहा जाता है, जिसमे आप शेयर को 3 से 5 साल के लिए खरीद कर रखते हैं और उसका दाम बढ़ने पर बेच देते हैं | 

यह वेल्थ बनाने का सबसे बढ़िया तरीका है जिसमे आपका पैसा 2 से 5 गुना तक बढ़ सकता है | 

बड़े – बड़े FII और DII को अगर किसी देश में शेयर मार्केट में पैसा डालना रहता है तो वह यही तरीका अपनाते हैं और शेयर को धीरे – धीरे खरीदते हैं और मुनाफा होने पर बेच देते हैं | 

Types of Trading in Hindi cover image
Types of Trading in Hindi cover image

स्विंग ट्रेडिंग (Swing trading

अगला ट्रेडिंग स्टाइल जो हम Types of trading in hindi में देखेंगे वो है स्विंग ट्रेडिंग | 

इस प्रकार की ट्रेडिंग में, Traders स्टॉक को कुछ समय के लिए खरीदते हैं जैसे कि – 5 से 7 दिन, लेकिन कभी-कभी यदि वो स्टॉक momentum में रहता है तो holding period कुछ सप्ताह से महीने तक चला जाता है | 

स्विंग ट्रेडिंग डिलीवरी ट्रेडिंग का एक प्रकार है जिसमें होल्डिंग पीरियड कुछ हफ्तों से एक महीने तक का हो सकता है | 

इस प्रकार के ट्रेडिंग में उपयोग किया जाने वाला time frame daily होता है। यह उनके लिए सबसे अच्छा है जो नौकरी या अन्य काम में व्यस्त रहते हैं और उनके पास बाजार को देखने के लिए ज्यादा समय नहीं रहता है।

स्विंग ट्रेडिंग एक बहुत ही अच्छा जरिया है जिसमें आप स्टॉक मार्केट से 15% से 20% का मुनाफा आसानी से कमा सकते हैं | 

अब बात आती है कि हमें स्विंग ट्रेडिंग कौन से स्टॉक में करना चाहिए | आप स्विंग ट्रेडिंग के लिए निफ्टी 50 के स्टॉक को चुन सकते हैं | 

निफ्टी 50 के अलावा आप निफ़्टी नेक्स्ट 50 और निफ्टी 100 के स्टॉक में भी स्विंग ट्रेडिंग कर सकते हैं | 

मोमेन्टम ट्रेडिंग (Momentum Trading)

मोमेंटम ट्रेडिंग एक ऐसे प्रकार की ट्रेडिंग है जिसमें आपको ऐसे स्टॉक को चुनना होता है जोकी बहुत कम समय में अच्छा प्रदर्शन किए हो | 

चूंकि यह स्टॉक बहुत ही कम समय में ऊपर चले जाते हैं तो आपको ऐसे स्टॉक में retracement होने का इंतजार करना है और सही समय में अपनी position बनानी है | 

मोमेंटम ट्रेडिंग में स्टॉप लॉस का बहुत महत्व होता है और टारगेट का भी | चूंकि स्टॉक मोमेंटम में रहता है तो आपको इसमें कम समय में अच्छा मुनाफा हो सकता है | 

मोमेंटम ट्रेडिंग में आप 5% है 7% के बीच में मुनाफा होने पर निकल सकते हैं | अगर आप सही मोमेन्टम स्टॉक को चुनते हैं तो इतना आपको तीन से चार दिन के भीतर ही प्राप्त हो जाएगा | 

मोमेंटम ट्रेडिंग आप ब्रेकआउट होने पर कर सकते हैं | जब भी किसी भी प्रकार का चार्ट पैटर्न ब्रेकआउट होता है या रेजिस्टेंस ब्रेक आउट होता है तब ऐसे समय में आप मोमेन्टम ट्रेडिंग कर सकते हैं | 

पोजीशनल ट्रेडिंग (Positional trading) – 

पोजीशनल ट्रेडिंग को आप स्विंग ट्रेडिंग की मदद से समझ सकते हैं |  स्विंग ट्रेडिंग अगर बेटा है तो पोजीशनल ट्रेडिंग उसका बाप है | 

जहां स्विंग ट्रेडिंग में आप 7 दिन से 15 दिन  लिए स्टॉक को खरीदने हैं वहीं पोजीशनल ट्रेडिंग में आप कुछ हफ्तों से कुछ महीनो के लिए शेयर को खरीदते हैं | 

इस प्रकार का ट्रेडिंग कई हफ्तों से लेकर महीनों तक भी  चला जाता है क्योंकि कीमत ऊपर, नीचे और साइड वेज़ में घूमती रहती है। 

इसलिए, यदि स्टॉक ऊपर की ओर या नीचे वाले trend में है, तो उस स्टॉक में  तब तक position बना सकते है जब तक कि ट्रेंड बदल न जाए। 

अगर आप पोजीशनल ट्रेडिंग करना चाहते हैं तो उसके लिए आपको वीकली टाइम फ्रेम और मंथली टाइम फ्रेम का इस्तेमाल करना चाहिए | 

इसके अलावा भी different types of trading in stock market in india में किए जाते हैं जो हम नीचे देखेंगे | 

सपोर्ट – रेसिस्टेंस (Support – Resistance trading)

सपोर्ट और रेजिस्टेंस ट्रेडिंग भी एक types of trading in stock market है | इस प्रकार का ट्रेडिंग sideways market में किया जाता है जब स्टॉक का प्राइस एक रेंज में घूमता है या फिर तब जब स्टॉक किसी विशेष चैनल में चल रहा होता है। 

जब स्टॉक सपोर्ट के पास आता है तब आप स्टॉक को खरीद सकते हैं और बाद में जब वह resistance पर पहुंच जाता है, तो आप स्टॉक को बेच सकते हैं | 

आपको हमेशा ट्रेडिंग का उद्देश्य पता होना चाहिए कि आप किस प्रकार की ट्रेडिंग कर रहे हैं। बाजार में किसी भी बुरी खबर के परिणामस्वरूप कीमत में गिरावट आ सकती है। 

इसलिए आप हमेशा सपोर्ट – रेसिस्टेंस ट्रेडिंग, स्विंग ट्रेडिंग में स्टॉप लॉस का इस्तेमाल जरूर करें | 

आपके सहूलियत के लिए मैं  सपोर्ट और रजिस्टेंस का चार्ट साझा कर रहा हूं जिसे आप देख सकते हैं और स्पष्ट रूप से समझ सकते हैं कि support and resistance ट्रेडिंग कैसे काम करता है |

support-resistance and breakout chart
support-resistance and breakout chart

ब्रेक आउट ट्रेडिंग (Breakout trading)

Types of trading in hindi में अब हम जिस ट्रेडिंग के बारे में बात करेंगे उसका नाम है breakout trading

बैक आउट बहुत प्रकार के होते हैं जैसे – जब भी स्टॉक किसी रेंज में घूम रहा होता है तब उसमें ब्रेक आउट हो सकता है,  या फिर वह स्टॉक अपने रेजिस्टेंस को तोड़ता है तब ब्रेकआउट होता है | 

इसके अलावा जो विभिन्न प्रकार के चार्ट पैटर्न बनते हैं तो उसमें भी ब्रेक आउट होता है | यदि आप इन सब ट्रेडिंग स्टाइल को स्टॉप लॉस के साथ नहीं करते हैं तो, यह एक जोखिम भरा ट्रेडिंग हो सकता है। 

अगर आप शेयर बाजार में शुरुआत कर रहे हैं तो आपको इस तरह की ट्रेडिंग से बचना चाहिए। सबसे पहले आप स्विंग ट्रेडिंग, support-resistance पर अपना कमांड बनाएं | 

अगर वह आपको आत्मविश्वास देता है तो ही इस प्रकार के ट्रेडिंग में आगे बढ़ें।

चूंकि बाजार में fake ब्रेकआउट होते हैं इसलिए इस प्रकार का ट्रेडिंग जोखिम भरा होता है। सही ब्रेकआउट को समझने के लिए कुछ मानदंड हैं जैसे :-

बड़ा ग्रीन कैंडल जो रेजिस्टेंस के ऊपर बंद होना चाहिए , उसमे ऊपर shadow नहीं होना चाहिए ,बड़ा volume होनी चाहिए । यह सब स्मार्ट मनी के भागीदारी को दर्शाता है।

डेरीवेटिव ट्रेडिंग

डेरिवेटिव ट्रेडिंग के अंदर दो तरह की ट्रेडिंग होती है एक फ्यूचर ट्रेडिंग और दूसरा ऑप्शन ट्रेडिंग | 

फ्यूचर ट्रेडिंग (Future Trading)

फ्यूचर ट्रेडिंग डेरीवेटिव ट्रेडिंग का एक प्रकार है जिसमे आप भविष्य के लिए ट्रेडिंग करते हैं | 

फ्यूचर  ट्रेडिंग आप इंडेक्स में कर सकते हैं, स्टॉक में कर सकते हैं और साथ-साथ कमोडिटी में भी कर सकते हैं | 

फ्यूचर ट्रेडिंग एक तरह का कांट्रैक्ट ट्रेडिंग होता है जिसमें आप किसी शेयर को  खरीदने बेचने का समझौता पहले ही कर लेते हैं | 

अगर आपकी एनालिसिस आपको कहती है कि कोई भी abc शेयर ₹120 से ₹130 जाएगा तो आप उस शेयर का फ्यूचर खरीदते हैं और जब उसका प्राइस 130 आ जाता है तो बेच देते हैं | 

इस तरह की ट्रेडिंग में स्टॉप – लॉस का बहुत बड़ा महत्व होता है | अगर आप फ्यूचर ट्रेडिंग में स्टॉप – लॉस नहीं लगाते हैं तो आपको बहुत बड़ा नुकशान हो सकता है | 

ऑप्शन ट्रेडिंग (Option Trading)

अगर आप Types of Trading in Hindi के बारे में पढ़ रहे हैं और उसमे ओपतीं ट्रेडिंग का उल्लेख नहीं है तो आपको इसके बारे में पता नहीं चल पाएगा |

ऑप्शन ट्रेडिंग डेरिवेटिव ट्रेडिंग के अंतर्गत ही आता है और इसे आप निफ्टी, बैंक – निफ्टी, स्टॉक और कमोडिटी में कर सकते हैं | 

स्टॉक मार्केट में दो तरह के ऑप्शन होते हैं जिसका नाम है Call और Put | 

अगर आपको लगता है कि मार्केट ऊपर जाएगा तो आपको Call ऑप्शन लेना रहता है और अगर लगता है मार्केट नीचे जाएगा तो Put ऑप्शन लेना रहता है | 

ऑप्शन से आप समझ सकते हैं कि आपके पास 2 तरीके के ऑप्शन हैं या तो ये होगा या तो वो होगा और जो भी होगा आपको उसे चुनना है | 

ऑप्शन ट्रेडर्स ऑप्शन ट्रेडिंग से दो तरीके से पैसे कमाते हैं एक तो ऑप्शन खरीद कर और दूसरा ऑप्शन को बेचकर | 

छोटे ट्रेडर जिनके पास 50000 से 1 लाख होता है वह ऑप्शन खरीद (option buying) कर के पैसे बनाते हैं और जिनके पास 5 लाख से ज्यादा पैसा होता है वह ऑप्शंस बेच (option selling) कर पैसे कमाते हैं | 

यह कुछ Types of Trading in Indian share market हैं जो भारतीय बाजार में किए जाते हैं |

मार्जिन ट्रेडिंग (Margin Trading)

मार्जिन ट्रेडिंग Types of Trading in Hindi का एक बहुत ही महत्वपूर्ण ट्रेडिंग है जो हर ट्रेडर को पता होना चाहिए | ऐसी ट्रेडिंग जो कम पैसे देकर या फिर किसी से पैसे लेकर ट्रेडिंग की जाती है उसे हम मार्जिन ट्रेडिंग कहते हैं | 

अगर आप इंटरनेट ट्रेडिंग करते हैं तो आपको ब्रोकर की तरफ से और 4x और 5x मार्जिन पर ट्रेडिंग करने को मिल जाता है | 

मार्जिन ट्रेडिंग में आप कम पैसों से ज्यादा क्वांटिटी ले सकते हैं जिससे आपका मुनाफा बढ़ जाता है परंतु अगर इसमें आपका नुकसान होता है तो आपको भारी नुकसान हो सकता है | 

मार्जिन ट्रेडिंग आपको तभी करनी चाहिए जब आपको टेक्निकल एनालिसिस का बहुत अच्छे से ज्ञान हो जैसे की – प्राइस एक्शन, सपोर्ट रेजिस्टेंस, कैंडलेस्टिक पेटर्न, वॉल्यूम एनालिसिस इत्यादि |

एल्गो ट्रेडिंग (Algo Trading)

अगर आपको किसी भी प्रकार की प्रोग्रामिंग आती है तो आप ऐल्गो ट्रेडिंग आसानी से कर सकते हैं बसर्ते आपको टेक्निकल एनालिसिस का ज्ञान हो होना चाहिए | 

बड़े-बड़े इंस्टीट्यूशन भी एल्गो ट्रेडिंग का इस्तेमाल करते हैं  क्योंकि उन्हें स्टॉक मार्केट में बहुत पैसा लगाना होता है जोकि वह एक बार में नहीं लगा सकते हैं | 

इसलिए वह दो से तीन बार में पैसे लगते हैं जिसके लिए वह सॉफ्टवेयर में पहले से ही प्रोग्रामिंग कर देते हैं और जब भी स्टॉक का प्राइस उस जगह पर आता है तो उनका आर्डर अपने आप खरीदा और बेचा जाता है | 

न सिर्फ स्टॉक को खरीदने के लिए बल्कि स्टॉक को बेचने के लिए भी बड़े-बड़े इंस्टीट्यूशन एल्गो ट्रेडिंग की सहायता लेते हैं | 

एल्गो ट्रेडिंग में आप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद ले सकते हैं आप AI की मदद से अपने सॉफ्टवेयर के लिए प्रोग्रामिंग लिखवा सकते हैं और उसे आप अपने सॉफ्टवेयर में डाल सकते हैं | 

मुहूर्त ट्रेडिंग (Muhurat Trading)

Types of Trading in Hindi अब हम muhurat ट्रेडिंग के बारे में जानकारी देंगे | यह एक विशेष प्रकार की ट्रेडिंग है जो सिर्फ धनतेरस के दिन की जाती है  और यह सिर्फ कुछ निश्चित समय – सीमा के लिए होती है जैसे कि – 1 घंटे के लिए | 

BTST trading और STBT ट्रेडिंग

BTST का पूरा नाम है Buy today sell tomorrow और STBT का पूरा नाम sell today buy tomorrow है | 

इस तरह की ट्रेडिंग में आप आज शेयर को खरीद कर कल उसे बेच देते हो और या फिर आज शेयर को बेचकर कल उसे खरीद लेते हो | 

इस तरह की ट्रेडिंग करने के लिए आप 1 hour टाइम फ्रेम का इस्तेमाल कर सकते हो | 

यह कुछ अलग – अलग types of trading practices हैं जो ट्रेडर्स लोग शेयर मार्केट में कर के पैसा कमाते हैं | 

Disadvantages of trading, ट्रेडिंग के नुकसान

  • यह आपके लिए एक नियमित आय स्रोत नहीं बन सकता है क्योंकि आपके द्वारा ट्रेडिंग किए जाने वाले धन में उतार-चढ़ाव हो सकता है। चूंकि आप कभी लाभ कमाते हैं और कभी-कभी आप नुकसान भी करते हैं।
  • आपको पहले अपना mindset विकसित करना चाहिए फिर ट्रेडिंग शुरू करना चाहिए। क्यूंकि mindset आपको असफलताओं से लड़कर फिर से खड़ा होने में मदद कर सकता है।
  • यदि आप scalping ट्रेडिंग कर रहे हैं, तो लंबे समय में इसका आपके मन और शरीर पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा।
  • स्टॉप लॉस न बनाए रखने से किसी भी प्रकार के ट्रेडिंग में पैसे ख़तम हो सकता है।
  • आपको अपने व्यक्तित्व के अनुसार अपनी ट्रेडिंग शैली विकसित करनी चाहिए। क्यूंकि सभी इंसान अलग-अलग होते हैं इसलिए आपको कभी दुसरे का ट्रेडिंग स्टाइल कॉपी नहीं करना चाहिए आपको अपने व्यक्तित्वा के आधार पर अपना ट्रेडिंग स्टाइल चुनना चाहिए |
  • यदि आप ट्रेडिंग कर रहे हैं और ट्रेडिंग जर्नल नहीं रखते हैं, तो आप ट्रेडिंग यात्रा में अपनी ग्रोथ नहीं देख सकते हैं।

Advantages of trading ट्रेडिंग के लाभ

  • यह एक लंबी यात्रा है। इस यात्रा में आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। हर प्रॉफिट – लॉस में आपको नई सीख मिलती है।
  • यदि आपके पास एक income है तो यह आपके लिए दूसरी आय का स्रोत बन सकता है।
  • यदि आप उचित ट्रेडिंग सिस्टम के साथ अच्छी तरह से ट्रेडिंग करते हैं और स्टॉप लॉस रखते हैं तो आप कम समय में अच्छी रकम कमा सकते हैं।
  • आपके पास नई चीजें सीखने का अच्छा समय rehta है क्योंकि बाजार खुलने और बंद होने की समय सीमा 6:15 ghante hai।
  • नीचे ट्रेडिंग के अन्य लाभों पर कमेंट करें।

Who should do trading? ट्रेडिंग किसे करनी चाहिए?

यदि आप कोई काम कर रहे हैं या व्यवसाय कर रहे हैं और आय के अन्य स्रोत की तलाश कर रहे हैं, तो यदि इसे ठीक से किया जाए, यह आपकी आय का एक और स्रोत बन सकता है ।

यदि आप छात्र हैं और पढ़ाई कर रहे हैं और बाजार और ट्रेडिंग के बारे में सीखने का आनंद ले रहे हैं, तो आप बाद में करियर के अवसर की तलाश कर सकते हैं।

यदि आपके पास अतिरिक्त पैसा है, जिसकी आपको जल्द ही आवश्यकता नहीं है, तो आप उस पैसे को शेयरों में पार्क कर सकते हैं यदि आप analysis करना जानते हैं या अन्यथा आप म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं।

Money required to do stock trading, स्टॉक ट्रेडिंग करने के लिए आवश्यक धन

यदि आप options को सीखते हैं, तो INR 5000 से INR 10000 के साथ आप apne paison se shuru kr sakte hain और बढ़ा सकते हैं यदि इसे ठीक से किया जाए लेकिन इसमें कोई निश्चितता नहीं है कि आप हमेशा लाभ कमाएंगे। कभी-कभी आप नुकसान भी करते हैं लेकिन हमेशा याद रखें कि नुकसान और लाभ ट्रेडिंग का हिस्सा हैं।

INR 10k – 20k के साथ आप एक दिन के ट्रेडिंग में अच्छा लाभ कमाने के लिए इंट्राडे ट्रेडिंग शुरू kar sakte hain।

हमेशा इस मानसिकता के साथ ट्रेडिंग करें कि नुकसान न्यूनतम होना चाहिए और यदि आप एक लाभदायक ट्रेडिंग करते हैं तो आपका लाभ नुकसान को कवर कर le।

वैसे आप 10 से 20 हज़ार रुपयों से ट्रेडिंग स्टार्ट कर सकते हैं |

Types of Trading in Hindi निष्कर्ष

आज के इस लेख में हमने आपको विभिन्न ट्रेडिंग के प्रकार के बारे में बताया और इसके साथ – साथ all types of trading in hindi के बारे में भी बताया है

अगर आपको किसी भी प्रकार का संदेह है तो आप नीचे कमेन्ट बॉक्स में लिख सकते हैं और किसी भी प्रकार का सवाल है तो उसे भी पूछ सकते हैं |

FAQ

शेयर मार्केट में कितने प्रकार की ट्रेडिंग होती है ?

मुख्य रूप से देखा जाए तो ट्रेडिंग 4 से 5 प्रकार की होती है – Scalping, स्विंग ट्रेडिंग, ब्रेकआउट ट्रेडिंग, इंट्राडे ट्रेडिंग इत्यादि |

शेयर मार्केट में कौन सी ट्रेडिंग सबसे अच्छी होती है ?

अगर आपको किसी भी प्रकार का चार्ट टेंशन नई चाहिए तो आप डेलीवेरी ट्रेडिंग कर सकते हैं और स्विंग ट्रेडिंग भी कर सकते हैं |

शेयर मार्केट में होने वाली 5 ट्रेडिंग का नाम क्या है ?

Scalping, इंट्राडे ट्रेडिंग, स्विंग ट्रेडिंग, positional ट्रेडिंग और मोमेन्टम ट्रेडिंग |

मेरा नाम कौशल कुमार है और मैं इस वेबसाईट का संस्थापक हूँ | मैं इस वेबसाईट के माध्यम से आप सभी को शेयर मार्केट की बारीक जानकारियों को बताना चाहता हूँ जिससे आप भी शेयर मार्केट से पैसे कमा सकें | मैं शेयर मार्केट में काफी समय से काम कर रहा हूँ और मेरा उद्देश है कि अपने अनुभव को आप तक पहुंचा सकूँ |

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